क्या हमारे बीच सिर्फ यही एक टॉपिक रह गया है बात करने को ?( Is this the only topic left among us to talk ?)
सच है यार क्या बात करें...
क्या बात करूं? किस बारे में बात करूं? पास बैठूं या नहीं? क्या शर्म आती है या फिर डर लगता है? मेरी ये पोस्ट हर किसी के लिए नहीं है। पर हां ज़रूर कुछ लोगो के लिए है। में आज यहां ना तो किसी गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड के रिश्ते को लेकर आया हूं ना ही दोस्तो की बात करूंगा। ये पोस्ट कुछ अलग है जैसा मैने महसूस किया है अपनी आधी जिंदगी में,शायद कईयों ने किया होगा। जी हां, मैं एक बेटा हूं सबकी तरह। मेरी ये पोस्ट एक पिता और पुत्र के रिश्ते को लेकर है। तो मुझे ऐसा लगता है कि इस पोस्ट को पढ़ने की जरूरत बेटों से ज्यादा कई पिता को है।
दोस्तो, मेरे घरवाले मुझे हमेशा टोकते है की जब तेरे पापा इस कमरे में होते है तब तू दूसरे मैं होता है जब वो इसमें होते है तब तू दूसरे मैं होता है जब वो छत पर होते है तब तू नीचे होता है जब वो नीचे होते है तब तू ऊपर होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब भी में उनके पास होता हूं बस एक ही चीज सुनाई पड़ती है। कैरियर कैरियर और कैरियर। कभी किसी और बात पर डिस्कशन नहीं होता। तो क्या सिर्फ हमारे बीच बस यही टॉपिक रह गया है बात करने को। और अब तो आदत सी भी हो गई है कि शायद कुछ नहीं बचा है बात करने को, पर हमे पता है ऐसा नहीं है हमने अपनी जिंदगी में आजतक कभी अपने पापा से आई लव यू नहीं कहा। वैसे हमे पता है कि हम एक दूसरे से प्यार करते है। पर कहने मैं शर्म आती है। और ना ही मैं अपनी जिंदगी मैं कभी उनसे खुलकर बात कर पाया। शायद इसीलिए मेरी जिंदगी के कुछ बड़े फैसले लेने में मुझे थोड़ी देर हो गई। कुछ कहेंगे इसमें हम बेटों कि गलती है कुछ कहेंगे इसमें पिता की गलती है पर दोस्तो अगर हम और पिता- पुत्र की तरह नहीं रह पा रहे है तो इसमें हमारी कोई गलती नहीं है। जिंदगी के शुरुआती दिनों में हम सबने अपने पिता से डांट खाई है मार भी खाई है किसी ने ज्यादा खाई है तो किसी ने कम। किसी पिता ने अपने बेटों को शुरुआत से तवज्जो नहीं दी तो किसी पिता ने जरूरत से ज्यादा दी।
तो बचपन के इन्हीं सब चीजों का असर हम जिंदगी भर देखते है। प्यार तो बराबर है इस दुनिया के हर पिता का प्यार समान है। पर तरीका अलग अलग है। किसी के पिता ज्यादा गुस्सा करते है तो किसी के पिता गुस्सा करते ही नहीं। किसी पिता पुत्र का रिश्ता बिल्कुल दोस्त की तरह होता है तो किसी का अनजान की तरह। मुझे लगता है कि इस रिश्ते को बहुत बेहतर बनाया जा सकता है।
ये फोटो कितना कुछ दर्शाती है। ये बात सही है हम सब अपने पिता से बेशुमार मोहब्बत करते है। ये बात हमे भी पता है और हमारे पिताजी को भी। लेकिन हम कह नहीं सकते। जबकि कुछ बेटे आसानी से बोल देते है। पर ये काम शायद हमे अपनी जिंदगी का सबसे मुश्किल काम लगता है। जो लोग अपने पापा से दोस्त की तरह है वो लोग ये बात नहीं समझेंगे। पर में जानता हूं कुछ बेटे समझेंगे। दोस्तो, हम लोग जब से पैदा होते है तब हमारा रिलेशन अपने पिता के साथ कैसा होता है फिर धीरे धीरे जब हम बड़े होते जाते है 10 साल 15 साल 18 साल। तो इन बीते सालो मैं हमारा रिलेशन कैसा रहा है इसी बात पर हमारा भविष्य का रिलेशन टीका हुआ रहता है। बचपन में हमे चलने से लेकर स्कूल छोड़कर आने तक का तो सफ़र बहुत प्यारा रहा मगर जब इन दिनों के बाद अगर कुछ ऐसा होता है कि हम अगर अपने पिता से डरने लगे तो ये बहुत ग़लत बात है। ये बात उस समय हम बच्चे नहीं समझ सकते पर हमारे पिता जरूर समझ सकते है। तो उन्हें फिर कुछ बदलाव लाने चाहिए। पिता हमेशा से ही हमारे पहले आदर्श और हीरो रहे होते है तो उन्हें बने रहना चाहिए।
देखिए, मुझे नहीं पता कि एक पिता क्या महसूस करते है। क्योंकि में पिता नहीं हूं। हां लेकिन एक बेटा होने के नाते जो मैने महसूस किया वो मैने बताया। हमारी भी कुछ जिम्मेदारियां होती है जो हमें निभानी चाहिए। लेकिन एक बेटा क्या चाहता है अपने पिता के प्रति क्या महसूस करता है हमे बचपन मैं अपने पिता से क्या मिलना चाहिए था कुछ ज्यादा नहीं पिता अपने बच्चो के साथ दोस्त रहे हमेशा ही ताकि भविष्य के कुछ फैसले गलत ना लिए जाए।मुझे पता है एक पिता के ऊपर जो जिम्मेदारियां रहती है उन्हें उनके सिवा और कोई नहीं निभा सकता। पर में इस पोस्ट के प्रति उनकी एक ओर जिम्मेदारी बढ़ा रहा हूं। क्योंकि उनके अलावा इसे ओर कोई नहीं निभा सकता। मुझे आशा है कि ये पोस्ट उन सभी पिता तक पहुंचे जो अपने बच्चो तक ना पहुंच सके।
दोस्तो मेरी पोस्ट कैसी लगी कॉमेंट करे और मुझे अपनी अगली पोस्ट का टाइटल भी बताए।
क्या बात करूं? किस बारे में बात करूं? पास बैठूं या नहीं? क्या शर्म आती है या फिर डर लगता है? मेरी ये पोस्ट हर किसी के लिए नहीं है। पर हां ज़रूर कुछ लोगो के लिए है। में आज यहां ना तो किसी गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड के रिश्ते को लेकर आया हूं ना ही दोस्तो की बात करूंगा। ये पोस्ट कुछ अलग है जैसा मैने महसूस किया है अपनी आधी जिंदगी में,शायद कईयों ने किया होगा। जी हां, मैं एक बेटा हूं सबकी तरह। मेरी ये पोस्ट एक पिता और पुत्र के रिश्ते को लेकर है। तो मुझे ऐसा लगता है कि इस पोस्ट को पढ़ने की जरूरत बेटों से ज्यादा कई पिता को है।
दोस्तो, मेरे घरवाले मुझे हमेशा टोकते है की जब तेरे पापा इस कमरे में होते है तब तू दूसरे मैं होता है जब वो इसमें होते है तब तू दूसरे मैं होता है जब वो छत पर होते है तब तू नीचे होता है जब वो नीचे होते है तब तू ऊपर होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब भी में उनके पास होता हूं बस एक ही चीज सुनाई पड़ती है। कैरियर कैरियर और कैरियर। कभी किसी और बात पर डिस्कशन नहीं होता। तो क्या सिर्फ हमारे बीच बस यही टॉपिक रह गया है बात करने को। और अब तो आदत सी भी हो गई है कि शायद कुछ नहीं बचा है बात करने को, पर हमे पता है ऐसा नहीं है हमने अपनी जिंदगी में आजतक कभी अपने पापा से आई लव यू नहीं कहा। वैसे हमे पता है कि हम एक दूसरे से प्यार करते है। पर कहने मैं शर्म आती है। और ना ही मैं अपनी जिंदगी मैं कभी उनसे खुलकर बात कर पाया। शायद इसीलिए मेरी जिंदगी के कुछ बड़े फैसले लेने में मुझे थोड़ी देर हो गई। कुछ कहेंगे इसमें हम बेटों कि गलती है कुछ कहेंगे इसमें पिता की गलती है पर दोस्तो अगर हम और पिता- पुत्र की तरह नहीं रह पा रहे है तो इसमें हमारी कोई गलती नहीं है। जिंदगी के शुरुआती दिनों में हम सबने अपने पिता से डांट खाई है मार भी खाई है किसी ने ज्यादा खाई है तो किसी ने कम। किसी पिता ने अपने बेटों को शुरुआत से तवज्जो नहीं दी तो किसी पिता ने जरूरत से ज्यादा दी।
तो बचपन के इन्हीं सब चीजों का असर हम जिंदगी भर देखते है। प्यार तो बराबर है इस दुनिया के हर पिता का प्यार समान है। पर तरीका अलग अलग है। किसी के पिता ज्यादा गुस्सा करते है तो किसी के पिता गुस्सा करते ही नहीं। किसी पिता पुत्र का रिश्ता बिल्कुल दोस्त की तरह होता है तो किसी का अनजान की तरह। मुझे लगता है कि इस रिश्ते को बहुत बेहतर बनाया जा सकता है।
ये फोटो कितना कुछ दर्शाती है। ये बात सही है हम सब अपने पिता से बेशुमार मोहब्बत करते है। ये बात हमे भी पता है और हमारे पिताजी को भी। लेकिन हम कह नहीं सकते। जबकि कुछ बेटे आसानी से बोल देते है। पर ये काम शायद हमे अपनी जिंदगी का सबसे मुश्किल काम लगता है। जो लोग अपने पापा से दोस्त की तरह है वो लोग ये बात नहीं समझेंगे। पर में जानता हूं कुछ बेटे समझेंगे। दोस्तो, हम लोग जब से पैदा होते है तब हमारा रिलेशन अपने पिता के साथ कैसा होता है फिर धीरे धीरे जब हम बड़े होते जाते है 10 साल 15 साल 18 साल। तो इन बीते सालो मैं हमारा रिलेशन कैसा रहा है इसी बात पर हमारा भविष्य का रिलेशन टीका हुआ रहता है। बचपन में हमे चलने से लेकर स्कूल छोड़कर आने तक का तो सफ़र बहुत प्यारा रहा मगर जब इन दिनों के बाद अगर कुछ ऐसा होता है कि हम अगर अपने पिता से डरने लगे तो ये बहुत ग़लत बात है। ये बात उस समय हम बच्चे नहीं समझ सकते पर हमारे पिता जरूर समझ सकते है। तो उन्हें फिर कुछ बदलाव लाने चाहिए। पिता हमेशा से ही हमारे पहले आदर्श और हीरो रहे होते है तो उन्हें बने रहना चाहिए।
देखिए, मुझे नहीं पता कि एक पिता क्या महसूस करते है। क्योंकि में पिता नहीं हूं। हां लेकिन एक बेटा होने के नाते जो मैने महसूस किया वो मैने बताया। हमारी भी कुछ जिम्मेदारियां होती है जो हमें निभानी चाहिए। लेकिन एक बेटा क्या चाहता है अपने पिता के प्रति क्या महसूस करता है हमे बचपन मैं अपने पिता से क्या मिलना चाहिए था कुछ ज्यादा नहीं पिता अपने बच्चो के साथ दोस्त रहे हमेशा ही ताकि भविष्य के कुछ फैसले गलत ना लिए जाए।मुझे पता है एक पिता के ऊपर जो जिम्मेदारियां रहती है उन्हें उनके सिवा और कोई नहीं निभा सकता। पर में इस पोस्ट के प्रति उनकी एक ओर जिम्मेदारी बढ़ा रहा हूं। क्योंकि उनके अलावा इसे ओर कोई नहीं निभा सकता। मुझे आशा है कि ये पोस्ट उन सभी पिता तक पहुंचे जो अपने बच्चो तक ना पहुंच सके।
दोस्तो मेरी पोस्ट कैसी लगी कॉमेंट करे और मुझे अपनी अगली पोस्ट का टाइटल भी बताए।



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