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क्या सचमुच डर के आगे जीत है? (Is victory really over fear?)

what was the morning really?
दोस्तो, अपनी जिंदगी का पहला जॉब के अनुभव के बारे में बात कर रहा हूं। दोस्तो मैं स्कूल टाइम में कई बार स्टेज परफॉर्मेंस दे चुका हूं। कई जगह डांस भी कर चुका हूं बिल्कुल भी शर्मिला नहीं हूं। और तो और मैं इस जॉब से पहले चार पांच जगह पहले ही जॉब कर चुका हूं पर पता नहीं क्यों उस दिन इतना डर सा लग रहा था। पर मैने कैसे उस डर से जीत पाई आज में वहीं शेयर करने वाला हूं। क्योंकि सच मैं क्या सुबह थी यार वो।
दोस्तों मैं एक स्कूल मैं टीचर की जॉब के लिए जब गया पहले पहले तो मेरा नंबर ही कहीं भी नहीं आया फिर जब मुझे एक इंग्लिश मीडियम स्कूल ने जॉब दिया तब में काफी खुश था मैने सोचा चलो कहीं से शुरुआत तो हुई।



दोस्तों, मैने अच्छे से डेमो क्लास के लिए अपनी तैयारी कर ली थी। और जिस दिन मुझे डेमो के लिए जाना था उससे एक दिन पहले मैं थोड़ा बहुत डरा हुआ था ज्यादा नहीं बस थोड़ा बहुत। अगले दिन सुबह उठा तैयार भी हो गया पर धीरे धीरे मेरे घर से निकलने का टाइम आ रहा था एक डर सा लग रहा था। वो डर जॉब को खो देने का तो बिल्कुल भी नहीं था। पता नहीं क्यों पर अंदर से बहुत घबराहट हो रही थी पर फिर मैने सोचा कि अगर में यहां नहीं गया तो में फिर से फ्री घर पर ही बैठा रहूंगा जो कि मुझे बिल्कुल मरा हुआ फील करवाता था।

ठीक है, जैसे तेसे मैं घर से निकला। रास्ते में डर लग रहा था मुझे पता था कि अगर कहीं भी मेरे मन वापस जाने का हो तो मैं कुछ मोटिवेट करने वाली वीडियो या गाना सुन सकूं। इसलिए में पहले से ही इयर फोन लेकर आया था। फिर मैने गाने सुने जो की हमेशा ही मुझे मोटिवेट करते आए है और मैं आगे बढ़ा। 50% डर गायब हो चुका था ।स्कूल में अंदर जाने से पहले मैने एक ओर मोटिवेशनल सोंग सुना। फिर बिना डरे मैं स्कूल में चला गया। अंदर जाते ही थोड़ी देर तक प्रार्थना हुई जैसे जैसे प्रार्थना खत्म होती जा रही थी मेरा डर धीरे धीरे बढ़ता ही जा रहा था अब मैं स्कूल मैं तो इयर फोन में गाने भी नहीं सुन सकता था। डर इतना बढ़ चुका था कि में बस वापस जाने ही वाला था । में कोई भी बहाना बना देता और चला जाता और फिर कभी वापस भी न आता। 

फिर अच्छा मेरी मां का कॉल आया उन्होंने कुछ पूछा मैने जवाब दिया और कॉल रख दिया। मम्मी के कॉल से मुझे ध्यान आया कि मम्मी कि तबीयत खराब का बहाना मार के यहां से निकल जाता हूं और फिर वापस कभी आऊंगा ही नहीं। उस समय मुझे 100% बिल्कुल यही लग रहा था कि अब कैसे भी करके यही बहाना मारके निकलना है।  दोस्तो मैने बस यही सोच लिया था कि बस अब तो निकलना ही है मुझे। पर फिर मुझे मेरे बड़े बड़े सपने नजर आने लगे। वो सपने जिनकी वजह से में जी रहा हूं। या ऐसा कहें तो कि जिन सपनों ने मुझे जिंदा रखा हुआ है। वो सपने जिन्हें पाने के लिए मैं अपने एक एक डर को खत्म करता जा रहा था।



उसमे से एक डर आज मेरे सामने था। पर फिर टेबल पर एक पेज रखा हुआ था उस पर कुछ मोटीवेट करने वाली शायरी लिखी थी मैने जैसे ही पढ़ा डर अचानक 20% तक कम हो गया डर तो तब भी लग रहा था पर इतना कम हो चुका था कि में जाने को तैयार था। में उन लाइन को बार बार पढ़ता गया और बस पढ़ता गया। बस मैने सोच लिया था कि अब मैं ये जॉब पाने के लिए नहीं जाऊंगा अब जॉब मिले या ना मिले अब में अपने डर पर विजय पाने के लिए निकलूंगा। और फिर मैने सोचा अगर में आज डेमो क्लास में नहीं गया तो में अपने इस डर पर विजय नहीं पा सकूंगा । आगे मैने सोचा कि ना तो ये लोग मुझे जानते है ना ही उन्होंने मुझे पहले कभी देखा है। तो अगर में सेलेक्ट ना भी हुआ तो भी ये लोग मुझे दुबारा कभी नहीं मिलेंगे। तब भी मेरा कुछ नहीं जा रहा। ना तो ये लोग मुझे दुबारा मिलेंगे तो में क्यों इतना डर रहा हूं। क्यों इतना शरमा रहा हूं। जिन बाकी टीचर्स को में जानता नहीं हूं उनसे, जिन स्टूडेंट्स को में जानता नहीं हूं उनसे। तो आखिर में मुझे शरमाने का और स्कूल छोड़ के जाने का कोई कारण नहीं मिला और में हिम्मत करके डेमो क्लास देने चला गया।


 और उस दिन जितनी भी क्लासेज में मैने पढ़ाया। फिर पढ़ाने के बाद प्रिंसिपल सर ने मुझे कहा कि जिस जिस क्लासेज मैं आपने पढ़ाया है सभी बच्चो ने आपकी तारीफ की है। और अगले ही दिन तो मेरा वो डर करीब 10% ही रह गया था। अब मुझे इस डर पर जीत पाकर बहुत अच्छा लग रहा था और में ये भी सोच रहा था कि अगर में उस दिन चला जाता तो शायद अफसोस ही करता रहता। और अब मुझे मेरे आगे आने वाले डर पर भी इसी तरह जीत पानी है।
तो दोस्तो , अगर मेरी पोस्ट आपको अच्छी लगी हो तो कॉमेंट कीजिए। और अपनी कोई परेशानी हो तो बताइए।

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