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बेइज्जती सहना आसान नहीं है ये जरूरी है ( It is not easy to bear insult, it is necessary )

बेइज्जती जरूरी है ( Insult is necessary )
दोस्तो, मैने कभी सोचा नहीं था कि में इस टाइटल पर भी कभी पोस्ट लिखूंगा। पर अब मुझे ये जरूरी लगने लगा क्योंकि मैने कई बार अनुभव किया है। तो आज मैं इस टॉपिक पर खुल कर के बात करने वाला हूं।
दोस्तो, हम सभी ने कभी ना कभी किसी की बेइज्जती जरूर की होगी। और फिर अगर उसे बेइज्जती का मतलब असल मायने में पता है तो उसने आपसे कभी बात नहीं की होगी या फिर पहले जैसी दोस्ती नहीं रखी होगी।



और इसी तरह हमने भी अपनी कई बार बेइज्जती होने पर उस शख्स से बात करना बंद कर दिया होगा। हमारी नजर में ये फैसले बिल्कुल सही होते है। पर दूसरों की नजर में गलत। हमारी नज़र में ये बहुत बड़ी बेइज्जती होती है पर दूसरों कि नजर में बस एक छोटा सा मज़ाक। और फिर कहते है की इतने से मज़ाक पर ही बात करना बंद कर दिया। आगे चलकर हम मज़ाक और बेइज्जती मैं अंतर भी जानेंगे।
दोस्तो, मैं भी बहुत मज़ाक करता हूं। और मेरे दोस्त भी मेरा बहुत मज़ाक उड़ाते है लेकिन में उन मज़ाक को आराम से सह लेता हूं। कभी कभी वो मेरे माता पिता पर भी मज़ाक करते है में वो भी सह लेता हूं। क्योंकि में जनता हूं मेरे दोस्त दिल से उनकी इज्जत ही करते है इसलिए मुझे सब पता है। और फिर मैं भी उनका तबीयत से मज़ाक उड़ाता हूं। तो ये सब चलता रहता है। जैसे कभी आप अच्छे कपडे, अच्छा लुक लेकर अगर अपने दोस्तो के सामने जाते है या कोई नया हेयरकट करवाके जब अपने दोस्तो के सामने जाते होंगे तो चाहे आप किसी हीरो से कम ना लग रहे हो लेकिन वो तो जरूर आपका मज़ाक उड़ाते होंगे। और हमे भी उनसे यही उम्मीद होती है। जितना हो सके आपका उतना मज़ाक उड़ाएंगे। जैसे कि आपकी गर्लफ्रेंड के सामने जितना हो सके आपकी उड़ाते ही जाएंगे। जैसे कि उनकी जिंदगी का सिर्फ एक ही मकसद रह गया है आपका मज़ाक उड़ाना बस। लेकिन फिर भी हमे बहुत मज़े आते है, हसी आती है।                
     
                                                             
तो दोस्तो, फिर जब कोई ऐसा मज़ाक जो हमसे सहन नहीं होता। हमे बुरा लगता है। हमे गुस्सा दिलाता है तो इसे हम अपनी बेइज्जती समझते है जबकि सामने वाला फिर भी इसे मज़ाक ही समझेगा पर आपके लिए वो मज़ाक ना होकर एक बेइज्जती हो जाती है। दोस्तो मेरी भी जिंदगी मै अनेकों बार बेइज्जती हुई है कभी दोस्त ने कि कभी घरवालों ने कि यहां तक कि कभी कभी उन लोगो ने भी कि जिन्हें मैं जानता तक नहीं। और मैने वो सब बेइज्जती अपनी डायरी में संभाल कर लिख ली। तो मैने इस पोस्ट को लिखने से पहले जब अपनी सारी बेइज्जती दुबारा से पढ़ी तब मुझे एहसास हुआ कि जब किसी इंसान या किसी वस्तु या किसी भी चीज को लेकर जब हमारे कुछ सपने होते है। और मेरी उन सभी बेइज्जती मैं सपने है। और अगर किसी इंसान के जब कुछ सपने नहीं होते तो उसे बेइज्जती महसूस भी नहीं होती।

या दोस्तो कभी कभी तो बेइज्जती इसलिए भी महसूस होती है कि भविष्य मैं आप अपने आप को जैसे भी सफल पाओगे या जैसे भी सफल सोचते हो लेकिन अगर सामने वाला आपको उस हिसाब से इज्जत ना दे तो भी बेइज्जती लगती है पर सामने वाले को थोड़ी पता है कि आप भविष्य मैं अपने आपको इतना सफल मानते हो। और दोस्तों कभी कभी तो ऐसा भी होता है कि किसी इंसान का ना तो कोई मकसद होता है और ना ही कोई सपना पर उसके साथ किया गया कोई मज़ाक उसे बेइज्जती महसूस करवाए तो उसे अपने सपने मिल जाते है।
क्योंकि बिना सपनों के,बिना मकसद के तो जानवर भी जीते है पर अगर हम इंसान है तो इंसान की तरह जीना चाहिए।

दोस्तो, अगर किसी इंसान से हमे बहुत उम्मीदें है और वो हमारी बेइज्जती भारी महफ़िल में भी कर दे तो बेइज्जती नहीं दुख होता है।
तो दोस्तो की गई बेइज्जती का हमेशा स्वागत करो क्योंकि यही नींव बनेगी आपकी सफलता का आपकी कामयाबी का। की गई बेइज्जती का एक एक लव‌्ज याद रखें, चाहे तो लिख ले। दोस्तो ये बात हमेशा ध्यान रखना बेइज्जती और गुस्सा आपकी जिंदगी में हमेशा बदलाव लाएगा। हां पर बेइज्जती और गुस्से से आप लोग गलत मतलब मत निकालिएगा की आपकी नाक पे गुस्सा हमेशा रखा रहे या जबरदस्ती बेइज्जती करवाए। समझने वाले समझ गए। 
तो दोस्तो मुझे आशा है आपको ये पोस्ट पसंद आई होगी। कॉमेंट करके बताए और मुझे मेरी अगली पोस्ट का टाइटल भी दीजिएगा।

टिप्पणियाँ

  1. Beijatti sirf sapno ki nahi hoti Kabhi Kabhi uss sapne ko poora karne ke liye ki gai koshish ke hoti hai jisse jyada hurt feel hota hai.... Kyuki humane uss sapne ko poora karne ke liye kya kya sacrifice kiya ya kitni mehenat ki kisi ko nahi Pata hota.. Sirf himr Pata hota hai...... Nice blog 😃

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