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पढ़ोगे लिखोगे बनोगे खराब , खेलोगे कूदोगे बनोगे नवाब ...खेल से आपकी जिंदगी बदल सकती है ( by Reading becomes bad and by playing becomes Nawab, games can change your life )

खेल एक जादू है
जब मैं छोटा बच्चा था,खेल में मेरी तभी से रुचि थी इसीलिए आज मैं ये पोस्ट लिख पा रहा हूं।इसीलिए मैं अपने रोजाना के शेड्यूल में से कुछ घंटे खेलने के लिए निकालने की कोशिश करता हूं और सुबह शाम एक्सरसाइज,योगा करता हूं।अगर हम सभी चाहे तो रोजाना थोड़ा टाइम खेल के लिए दे सकते है।

ये बात हम सभी जानते है कि खेल से हमारा शरीर और दिमाग सभी स्वस्थ रहेगा पर आजकल के व्यस्त जीवन में कोई समय नहीं निकाल पा रहा है या फिर निकालना नहीं चाह रहा है ये तो आप ही जानते है।
में आपको यह जोर नहीं दूंगा कि आपको खेलना ही खेलना है शायद मैं कौन होता हूं और वैसे भी कभी कोई किसी के समझाने से नहीं समझता है जब उसे लगता है वो तभी सही काम करता है।
दोस्तो आप अपने से छोटे बच्चो को जब भी देखते होंगे तो आपको अपना बचपन जरूर याद आ जाता होगा।की आप भी बचपन मैं इसी तरह खेला करते थे बिना किसी की टेंशन लिए ना पैसे की ना खाने की ना किसी इंसान की लेकिन फिर भी इतने खुश थे की अब ऐसा लगता है कि बड़े क्यों हो गए
देखिए तो सही ज़रा इन बच्चो को शायद अभी इनके पास एक रुपया ना होगा लेकिन देख के लगता है कि इन्हें उसकी टेंशन है शायद अभी इनके पास पहनने को बस दो जोड़ी कपड़े होंगे पर क्या इन्हे देखकर लगता है कि इन्हे उसकी टेंशन है ये भी हो सकता है कि अभी इनके पास रहने को घर भी ना हो पर क्या इन्हे देखकर लगता है कि इन्हे घर की टेंशन है हो सकता है कि खाना भी एक टाइम का ही नसीब होता हो पर सच में इनकी आंखों में ऐसा कुछ नहीं दिखता ।बल्कि ऐसा लगता है कि इनके पास सबकुछ है ।
इन्हे बड़ा आलीशान घर नहीं चाहिए इन्हे महंगे महंगे ब्रांडेड कपड़े नहीं चाहिए इन्हे होटलों का खाना नहीं चाहिए इन्हे लाखो करोड़ो रुपए भी नहीं चाहिए तो फिर ये इतने खुश क्यों है खुश क्यों है ये मिट्टी में ही खेलकर, खुश क्यों है ये रूखी सूखी खाकर, खुश क्यों है ये गंदे कपड़े पहनकर, खुश क्यों है ये बिना सिक्को के, खुश क्यों है बिना साइकिल के,खुश क्यों है ये बिना टेडीबियर के, खुश क्यों है ये बिना वीडियोगेम के,खुश क्यों है ये बिना बर्गर खाएं बिना पिज़्ज़ा खाएं, खुश क्यों है ये बड़े बड़े झुलो मैं बिना झूले, खुश क्यों है ये बिना कार में बैठे, खुश क्यों है ये बिना टीवी में कार्टून देखे,खुश क्यों है ये...
ये खुश इसलिए है क्योंकि इनके पास खुश रहने का कोई जरिया नहीं है,ये खुश रहने के लिए किसी चीज के आदी नहीं है ये खुश है इसलिए ही ये खुश है ये हर उस चीज में खुशी ढूंढते है जो कि भगवान ने बनाई है ना कि इंसान ने,इन्हे प्रकृति से प्यार है इन्हे पानी से प्यार है ना कि स्विमिंग पूल से इन्हे मिट्टी से प्यार है ना कि खिलौनों से इन्हे पेड़ पोधो से प्यार है इन्हे फलो से प्यार है ना कि पिज़्ज़ा बर्गर से,इन्हे साइकिल से प्यार नहीं है क्योंकि इन्हे इनके पैरो पर भरोसा है इन्हे झूले नहीं खुलने क्योंकि इन्हे पेड़ की शाखाएं प्यारी है,इन्हे टीवी पर कार्टून नहीं देखना क्योंकि फिर धूल मिट्टी में कौन खेलेगा इन्हे ब्रांडेड कपड़े नहीं पहनने क्योंकि फिर बारिश में नंगा होकर कौन भीजेगा।
सही बात है हमने अक्सर देखा होगा जब भी बारिश होती है तब जो युवा या बड़ी उम्र के लोग होते है उनका हाथ बारिश में अपने सिर पर उल्टा रखा होता है मानो वो बारिश की बूंदे उनसे सहन नहीं हो रही और जो बच्चे होते है वो खुले हाथो से उन बूंदों का स्वागत करते है।फर्क तो है ही ना दोस्तो।
दोस्तो हम जितना सोचते है उतना कम लाभ नहीं है खेल खेलने के बल्कि खेल खेलने से हमारा अनगिनत तरीको से लाभ होता है  दोस्तो हम सबको पता है कि खेल खेलने से हम हमेशा स्वस्थ रहेंगे जो बीमारियां बच्चो को 
छोटी उम्र में ही हो जाती है उनका कारण सिर्फ एक ही होता है और वो है शरीर का इस्तेमाल ना किया जाना तो दोस्तो अगर हम बच्चो को बाहर खेलने देंगे तो ऐसी किसी भी परेशानी का सामना करना नहीं पड़ेगा।खेल खेलने से हम जिंदगी मैं आने वाले किसी भी प्रैशर वाले परिस्थिति को पार कर सकते है आजकल के युवा बच्चे जो कम मार्क्स आने की वजह से आत्महत्या कर लेते है क्यों कि उनसे प्रैशर हैंडल नहीं हो पाता तो खेल खेलने से हम प्रैशर को हैंडल करना सीखते है ।दोस्तो खेल हमें कॉम्पिटिशन का महत्व समझाती है खेल से हम मेहनत करना सीखते है खेल से हमारी एकाग्रता शक्ति बढ़ती है और हमारा मन स्थिर होता है खेल से हम सीखते है की हमे किस तरह सबको साथ लेकर चलना होता है खेल से हम प्लान करना सीखते है ,खेल से हम हार कर जितना सीखते है,
खेल आपको किसी भी काम के लिए पहले से तैयार होना सीखाता है ,खेल आपको खुश रखता है  "दि विराट कोहली" ने भी यही कहा है खेलो से आपको चोट लग जाती है पर फिर भी आप उस चोट को भूलकर खेलते हो और खुश होते हो तो वो परिस्थिति और जब आप हारते हो फिर जीतते हो तो निराशा और खुशी का साथ साथ होना आपके जीवन में बहुत मदद करेगा ,कुछ बच्चे या बड़े जो मोटे हो जाते है फिर उन्हें आलस आने लगते है तो वो मोटापा फिर उनसे कम भी नहीं हो पाता क्योंकि उनको बचपन से ही खेलो से दूर रखा गया है और जो बच्चे बचपन से ही खेलते है तो अगर वो मोटे भी है तो भी उन्हें हमेशा ही एक्टिव सा महसूस होता है। जो लोग अभी जिम जाकर हजारों रुपए देकर अपना शरीर बनाते है पर जिनके पास पैसे नहीं है वो कहा जाए तो दोस्तो आपको अपने शरीर के लिए पैसे देने की जरूरत नहीं है बस आप रोजाना कुछ वक़्त खेलें ।
दोस्तो खेल आपको जिंदगी में सबकुछ सीखाता है इसलिए दोस्तो मैं आप परिजनों से भी उतनी ही विनती करता हूं कि अपने बच्चो को आप जितना पढ़ाते भी है उतना खेलना भी सीखाए क्योंकि उन्हें खेल ना खिलाकर आप उनके ही जीवन को मुश्किल बना रहे है ।तो अगर आप उनका भला चाहते है तो उन्हें कृपा करके उन्हें खेलने दे।
बल्कि में तो कहता हूं कि आप भी उनके साथ समय निकालकर खेलने जाए एक बार जाकर तो देखिए शायद दुनिया की सबसे अलग ही खुशी मिलेगी हो सकता है कि घर बैठे बैठे आपका मन ना करे खेलने का ऐसा खयाल आए कि ऑफिस के काम से थक गया तो थकान हो तो मेरी मानिए खेलने से आपकी सारी थकान दूर होगी मैं कितना भी काम करलू पर खेलने से हमेशा ही फ्रेश महसूस करता हो इसलिए खेलता हूं मेरी बाते उन लोगो को समझ में आयेगी जो खेलते है ।क्योंकि उन्हें पता है कि खेलकर उन्हें क्या मिल रहा है और जो नहीं खेल रहे है वो क्या खो रहे है।
तो खेले और स्वस्थ रहे...प्रकृति से जुड़े..
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