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क्या यहां उम्मीद है? उम्मीद हमारी जिंदगी में हमेशा उपस्थित रहती है ( is there hope,hope is always present in our life )

उम्मीद?

उम्मीद होती क्या है?किस्से होती है? क्यों होती है?उम्मीद करनी चाहिए या नहीं?उम्मीद करने से क्या होता है? और ना करने से क्या होता है?
ये ऐसे कई सवाल है जो हमारे मन में कई बार आते है और सच बात तो ये भी है कि हमने इन सवालों के जवाब पाने की कभी कोशिश ही नहीं कि शायद इसलिए ही हम दूसरो से नाराज़ होते है हमारे रिश्ते खराब करते है आज हम इन्हीं सवालों के काफी हद तक जवाब पाने की कोशिश करेंगे।

दोस्तो अगर हम किसी के लिए कुछ अच्छा या बुरा जो भी करते है तो उसके बदले में हम अपने मन में सोच लेते है कि इसके बदले में शायद हमें भी उससे कुछ अच्छी प्रतिक्रिया मिलेगी या बुरी तो इसे ही हम उम्मीद कहते है।
पर चाहे हम किसी के साथ अच्छा करे या बुरा हमें उम्मीद तो अच्छे कि ही रहती है।

उम्मीद किस्से होती है?
दोस्तो ऐसा नहीं है, उम्मीद हमें सिर्फ उसी से होती है को अपने है बल्कि उनसे भी होती है जो पराए है ।पर हमें महसूस सिर्फ अपनों का ही हो पाता है।फर्क सिर्फ इतना ही रह जाता है कि अगर अपनों से उम्मीद टूटती है तो हम कहते है ये उम्मीद नहीं थी और वही उम्मीद अगर परायो से टूटती है तो हम कहते है यही उम्मीद थी।
उम्मीद क्यों होती है?
दरअसल सच्चाई यही है कि चाहे हम कितना ही इस बात पर ध्यान लगा ले कि अब उम्मीद नहीं करूंगा किसी पर भी ,पर सच तो ये है दोस्तो कि हमें पता ही नहीं चलता कि कब हम उम्मीद करने लगे है।क्योंकी दूसरो से उम्मीद टूटने का तो शायद हमें पता ही नहीं चल पाता क्योंकि हमें दर्द ही नहीं होता।तो इस उम्मीद में हमें कोई खतरा नहीं होता ।असली खतरा अपनों से उम्मीद लगाने में ही होता है क्योंकि इनसे उम्मीद करते वक़्त हमें पाता ही नहीं चलता कि कब हम इनसे उम्मीद करने लगे है क्योंकि इनसे उम्मीद करने में भी हमें मज़ा आने लगा जाता है।और दोस्तो अगर हमें किसी से उम्मीद है और उस पर वो खरा उतर रहा है तब तक तो हमें बहुत मज़ा आता है पर जब हमारे मन की नहीं होती तब उम्मीद टूटने लगती है और हमें बहुत दुख होता है, हम रोने लगते है।

उम्मीद करनी चाहिए या नहीं?
दोस्तो इसके जवाब से शायद आप सहमत ना हो पर मेरे अनुसार हमें दूसरो की निस्वार्थ भाव से मदद करनी चाहिए और इसके परिणामों को भी ध्यान में रख लेना चाहिए अच्छे और बुरे दोनों क्योंकि दोस्तो उम्मीद तो हमें होगी ही सही अपनों से नहीं तो वो अपने ही किस बात के हुए बस उम्मीद टूटने पर हम कितनी जल्दी उससे सीख कर आगे बढ़ेंगे महत्व इस बात का है।

उम्मीद करने से और ना करने से क्या होता है?
दोस्तो मैं फिर कह रहा हूं कि ये हमारे हाथ में है ही नहीं कि हम उम्मीद करे या ना करे क्योंकि उम्मीद टूटने से अगर दुख पहुंचता है तो वहीं उम्मीद पूरी होने से बेइंतहा खुशी मिलती है ।दोस्तो दुख अगर हमें इससे नहीं होगा तो किसी और चीज़ से हो जाएगा खुशी अगर हमें इससे नहीं मिलेगी तो किसी और चीज़ से मिल जाएगी ।तो बस दोस्तो आप कोशिश करते रहिए की आप निस्वार्थ भाव से किसी कि मदद करते रहे और उसके परिणाम एक बार जरूर सोच ले कि हमें प्रतिक्रिया क्या मिलेगी ? और इसी के साथ ही आप एक बार खुद को दूसरे कि जगह रख कर भी सोचे शायद आपको सब समझ आ जाए।की आप उसकी जगह होते तो आप भी शायद यही करते ।
दोस्तो अगर आपको उम्मीद करने से सामने वाले कि प्रतिक्रिया अच्छी मिल रही है तो वह आपको कुछ सोचने की जरूरत नहीं बस खुश रहिए और उस पल का आनंद उठाइए 
पर अगर आपकी उम्मीद आपको टूटती हुई दिखाई दे रही है तो वहां आपको क्या करना है आप उसकी परिस्थती को समझिए कि वो ऐसा क्यों कर रहा है और फिर खुद को उसकी जगह रखिए क्योंकि दोस्तो इस बात से आप सहमत भी होंगे कि अगर कोई आपका अपना है तो उसे कोई खुशी नहीं मिलेगी आपकी उम्मीदों को तोड़कर आपको दुख पहुंचकर और अगर उसे खुशी मिल रही है तो वो आपका अपना हो हि नहीं सकता।तो उस इंसान को छोड़कर आगे बड़िए।इसी में सबकी भलाई है।
हो सकता में आपको आपका पूरी तरह से जवाब देने में असफल रहा हूं पर मैने आपकी लाइफ को आसान करने की बस एक कोशिश की है।

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